आजकल हर फिटनेस शौकीन के दिमाग में एक ही सवाल घूमता है – “कार्डियो कब करें?” क्या सुबह खाली पेट करना सही है? या शाम को? या फिर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के बाद?
साइंस और रिसर्च के हिसाब से कार्डियो का समय आपके फिटनेस गोल, लाइफस्टाइल और बॉडी क्लॉक पर निर्भर करता है। आइए विस्तार से समझते हैं।
1. मॉर्निंग कार्डियो – Empty Stomach (Fasted Cardio)
सुबह खाली पेट कार्डियो (जैसे तेज वॉक, हल्की रनिंग, साइक्लिंग) करने का ट्रेंड काफी लोकप्रिय है।
फायदे:
- रात भर की फास्टिंग के बाद शरीर ग्लाइकोजन कम होने पर फैट का इस्तेमाल ज्यादा करता है।
- दिन की शुरुआत एक्टिव लगती है, मूड अच्छा होता है।
- कुछ स्टडीज़ में हल्के फैट लॉस के फायदे दिखे हैं।
ध्यान दें:
- लो-इंटेंसिटी कार्डियो (जैसे वॉकिंग या हल्की साइक्लिंग) ज्यादा उपयुक्त है।
- ब्लड शुगर लो होने या चक्कर आने की संभावना हो तो पहले हल्का स्नैक लें।
2. ईवनिंग कार्डियो – जब एनर्जी पीक पर हो
शाम के समय शरीर का टेंपरेचर और मसल स्ट्रेंथ ज़्यादा रहती है।
फायदे:
- हाई इंटेंसिटी कार्डियो (HIIT) के लिए एनर्जी अधिक रहती है।
- परफॉर्मेंस बेहतर मिल सकती है क्योंकि मसल्स और फेफड़े वार्म रहते हैं।
- ऑफिस/स्टडी के बाद स्ट्रेस रिलीफ का अच्छा तरीका है।
ध्यान दें:
- सोने से ठीक पहले बहुत हाई इंटेंसिटी कार्डियो नींद को प्रभावित कर सकता है।
- अगर शाम को जिम जाते हैं तो स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के बाद हल्का कार्डियो ही करें।
3. वर्कआउट के बाद कार्डियो – स्ट्रेंथ + कार्डियो कॉम्बो
अगर आप स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं तो कार्डियो कब करें, यह बड़ा सवाल है।
साइंस क्या कहती है:
- स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पहले करने से मसल्स में ग्लाइकोजन खर्च हो जाता है।
- इसके बाद लो-मॉडरेट इंटेंसिटी कार्डियो करने से फैट ऑक्सीडेशन थोड़ा बढ़ सकता है।
- इससे मसल्स रिकवरी पर थोड़ा असर पड़ सकता है, इसलिए बहुत लंबा या हाई इंटेंसिटी कार्डियो न करें।
प्रैक्टिकल टिप:
- मसल बिल्डिंग गोल हो तो कार्डियो को अलग दिन या अलग टाइम पर शिफ्ट करें।
- फैट लॉस गोल हो तो स्ट्रेंथ के बाद 15–30 मिनट का मॉडरेट कार्डियो कर सकते हैं।
4. आपके फिटनेस गोल के हिसाब से सही समय
| आपका गोल | कार्डियो कब करें | इंटेंसिटी |
|---|---|---|
| फैट लॉस (बिगिनर) | मॉर्निंग या स्ट्रेंथ के बाद | लो-मॉडरेट |
| परफॉर्मेंस बढ़ाना (HIIT) | शाम या अलग दिन | हाई |
| मसल बिल्डिंग | कार्डियो और वर्कआउट को अलग रखें | लो-मॉडरेट |
5. कार्डियो का समय तय करने के लिए 3 सरल नियम
- कंसिस्टेंसी – जो टाइम आपके लाइफस्टाइल में फिट बैठता हो वही बेस्ट है।
- इंटेंसिटी मैच करें – हाई इंटेंसिटी के लिए एनर्जी पीक टाइम चुनें (अक्सर शाम)।
- रिकवरी को प्राथमिकता दें – स्ट्रेंथ के बाद लंबा या हार्ड कार्डियो न करें।
6. प्रैक्टिकल टिप्स (Science + Experience)
- वीक में 150 मिनट मॉडरेट कार्डियो (या 75 मिनट हाई इंटेंसिटी) WHO की गाइडलाइन है।
- अगर वजन कम करना लक्ष्य है तो डाइट + स्ट्रेंथ ट्रेनिंग + कार्डियो का कॉम्बो करें।
- कार्डियो से पहले हल्का वार्मअप और बाद में कूलडाउन जरूर करें।
- अपने हार्ट रेट जोन का ध्यान रखें – 60–75% मैक्स HR फैट बर्निंग के लिए, 80%+ कार्डियो फिटनेस के लिए।
निष्कर्ष (Conclusion)
कार्डियो का “सही” समय सबके लिए एक जैसा नहीं है।
- फैट लॉस के लिए मॉर्निंग या स्ट्रेंथ के बाद लो-मॉडरेट कार्डियो फायदेमंद।
- हाई परफॉर्मेंस या एथलेटिक ट्रेनिंग के लिए शाम बेहतर।
- सबसे अहम बात – कंसिस्टेंसी और आपकी बॉडी की फील।
आपके गोल, दिनचर्या और एनर्जी लेवल के हिसाब से जो टाइम सबसे प्रैक्टिकल लगे, वही आपके लिए बेस्ट है।