इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है?
इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) एक डाइट पैटर्न है जिसमें खाने और उपवास (फास्टिंग) के बीच समय तय किया जाता है। इसमें आप यह तय करते हैं कि दिन के कौन से घंटे में खाना खाएँगे और बाकी समय उपवास रखेंगे। यह कोई खास डाइट नहीं है, बल्कि खाने का एक साइंटिफिक टाइमटेबल है।
कैसे काम करता है इंटरमिटेंट फास्टिंग?
जब हम खाते हैं, तब हमारा शरीर इंसुलिन रिलीज करता है ताकि खाना एनर्जी के रूप में इस्तेमाल हो सके।
लेकिन जब हम उपवास करते हैं, तब इंसुलिन का स्तर गिरता है और शरीर जमा हुई फैट स्टोरेज को एनर्जी के लिए उपयोग करने लगता है।
इससे:
- फैट बर्न होता है
- इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है
- मेटाबॉलिज्म सुधरता है
इंटरमिटेंट फास्टिंग के लोकप्रिय तरीके
- 16/8 मेथड
- 16 घंटे उपवास और 8 घंटे का खाने का विंडो।
- सबसे लोकप्रिय तरीका है।
- उदाहरण: रात 8 बजे डिनर, फिर अगला खाना दोपहर 12 बजे।
- 5:2 डाइट
- सप्ताह में 5 दिन नार्मल खाना और 2 दिन सिर्फ 500–600 कैलोरी लेना।
- Eat-Stop-Eat
- सप्ताह में एक या दो बार 24 घंटे का फास्ट।
नोट: शुरुआत में 12/12 से शुरू करें, फिर धीरे-धीरे 16/8 की तरफ बढ़ें।
इंटरमिटेंट फास्टिंग के साइंस–बेस्ड फायदे
1. वजन घटाने में असरदार
- फास्टिंग के दौरान कैलोरी इनटेक कम हो जाती है।
- शरीर स्टोर की गई फैट का उपयोग करता है।
2. इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार
- टाइप-2 डायबिटीज के रिस्क को घटाता है।
- बल्ड शुगर कंट्रोल बेहतर होता है।
3. हार्मोन बैलेंस
- HGH (Human Growth Hormone) का स्तर बढ़ता है जिससे फैट लॉस और मसल बिल्डिंग आसान होती है।
4. कोशिकाओं की मरम्मत (Autophagy)
- शरीर की डैमेज सेल्स की सफाई होती है, जिससे एजिंग धीमी होती है।
5. मेंटल क्लैरिटी और फोकस
- दिमाग शांत और फोकस्ड रहता है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग के नुकसान (अगर गलत तरीके से करें)
- शुरुआती दिनों में थकावट, चक्कर, चिड़चिड़ापन हो सकता है
- महिलाओं में हॉर्मोनल असंतुलन हो सकता है
- कुछ मेडिकल कंडीशन्स (जैसे हाइपोग्लाइसीमिया, अल्सर) में नुकसानदायक हो सकता है
- एक्स्ट्रेम फैस्टिंग से मसल लॉस हो सकता है
डायबिटिक, प्रेग्नेंट महिलाएं या गंभीर बीमारी वाले लोग डॉक्टर से सलाह लें।
इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान क्या खाएं?
खाने के विंडो में आपको ध्यान देना चाहिए:
✔ क्या खाएं:
- प्रोटीन रिच फूड्स: दालें, टोफू, पनीर, प्रोटीन सप्लीमेंट
- हेल्दी फैट्स: बादाम, अखरोट, अलसी के बीज
- फाइबर: ओट्स, हरी सब्जियाँ
- कॉम्प्लेक्स कार्ब्स: ब्राउन राइस, क्विनोआ
- पानी और हर्बल टी
❌ क्या न खाएं:
- शुगर ड्रिंक्स
- जंक फूड
- फास्ट फूड
- प्रोसेस्ड फूड
उपवास के दौरान क्या ले सकते हैं?
- पानी
- ब्लैक कॉफी (बिना शक्कर)
- ग्रीन टी / हर्बल टी
- इलेक्ट्रोलाइट्स (बिना कैलोरी)
❌ दूध, जूस, चीनी वाली चीजें न लें – इससे उपवास टूट जाता है।
क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग में वर्कआउट किया जा सकता है?
हाँ, लेकिन ध्यान रखें:
- वेट ट्रेनिंग फास्टेड स्टेट में की जा सकती है
- प्री-वर्कआउट में ब्लैक कॉफी ले सकते हैं
- पोस्ट वर्कआउट में प्रोटीन शेक ज़रूर लें
- अगर कमजोरी महसूस हो, तो फीडिंग विंडो में ही वर्कआउट करें
क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग सबके लिए सही है?
नहीं। यह हर किसी के लिए नहीं है। यदि आपकी लाइफस्टाइल बहुत एक्टिव है या आप किसी मेडिकल कंडीशन से ग्रस्त हैं, तो यह आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
इंटरमिटेंट फास्टिंग एक वैज्ञानिक और प्रभावशाली तरीका है वजन घटाने और मेटाबॉलिज्म सुधारने का। लेकिन इसे सही जानकारी और प्लानिंग के साथ अपनाना ज़रूरी है।
अगर आप फिटनेस ट्रांसफॉर्मेशन चाहते हैं, तो यह आपके लिए बेहतरीन टूल हो सकता है — बशर्ते आप इसे सही तरीके से फॉलो करें।